महाराष्ट्र में “बुल्डोज़र संस्कृति” नहीं चलने देंगे: मतीन पटेल प्रकरण पर हाईकोर्ट की तल्ख़ टिप्पणी
छत्रपति संभाजीनगर [औरंगाबाद ] — AIMIM नगरसेवक मतीन पटेल के घर और कार्यालय पर हुई बुल्डोज़र कार्रवाई को लेकर 18 मे 2026 को बाॅम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने महानगरपालिका पर कड़ी नाराज़गी जताई। अदालत की तल्ख़ टिप्पणियों ने पूरे मामले को महाराष्ट्र की राजनीति और प्रशासनिक कार्यप्रणाली के केंद्र में ला खड़ा किया है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि महाराष्ट्र में “बुल्डोज़र संस्कृति” को प्रवेश नहीं करने दिया जाना चाहिए। न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा, “यह उत्तर प्रदेश या बिहार नहीं है,” और प्रशासन को कानूनसम्मत प्रक्रिया का पालन करने की सख़्त नसीहत दी।
न्यायालय ने छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका की कार्रवाई को प्रथम दृष्टया “मनमानी” बताते हुए पूछा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई अनिवार्य प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया। अदालत ने विशेष रूप से उस 15 दिन की नोटिस अवधि का उल्लेख किया, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने बुल्डोज़र या ध्वस्तीकरण कार्रवाई से पहले आवश्यक माना है।
मामला AIMIM नगरसेवक मतीन पटेल और स्थानीय निवासी हनीफ खान की संपत्तियों पर 13 मई को हुई बुल्डोज़र कार्रवाई से जुड़ा है। महानगरपालिका ने दावा किया था कि संबंधित निर्माण अवैध थे और नगर निगम अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई। वहीं मतीन पटेल की ओर से अदालत में दायर याचिका में आरोप लगाया गया कि प्रशासन ने जल्दबाज़ी और राजनीतिक दबाव में कार्रवाई की तथा उचित कानूनी अवसर नहीं दिया।
आज की सुनवाई में याचिकाकर्ता पक्ष ने अदालत को बताया कि पहले भी प्रशासन की ओर से यह आश्वासन दिया गया था कि किसी भी प्रकार की कठोर कार्रवाई से पहले नियमानुसार प्रक्रिया अपनाई जाएगी, लेकिन इसके बावजूद भारी पुलिस बंदोबस्त और जेसीबी मशीनों के साथ सुबह-सुबह ध्वस्तीकरण अभियान चलाया गया। इस पर अदालत ने नाराज़गी व्यक्त करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति का घर बनाना आसान नहीं होता और प्रशासन को संवेदनशीलता बरतनी चाहिए।
गौरतलब है कि यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब नासिक TCS प्रकरण की आरोपी निदा खान को कथित तौर पर शरण देने के आरोप में मतीन पटेल का नाम सामने आया। इसके बाद महानगरपालिका ने उनके घर, कार्यालय और कुछ दुकानों पर अवैध निर्माण का आरोप लगाते हुए बुल्डोज़र कार्रवाई की थी।
अब इस मामले में हाईकोर्ट की अगली सुनवाई 15 जुन को होने वाली सुनवाई पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि अदालत की आज की टिप्पणियों ने महाराष्ट्र में बुल्डोज़र राजनीति और प्रशासनिक अधिकारों की सीमाओं पर नई बहस छेड़ दी है।
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