अमेरिका तलाश रहा है इरान युद्ध से बहार निकलने का रास्ता — सीमित मिशन के दावे के बीच अमेरिका पर रणनीतिक दबाव
( अली रज़ा आबेदी ) अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सोमवार को Pentagon में संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि ईरान में जारी अमेरिकी और इज़रायली सैन्य अभियान किसी “लंबे युद्ध” या अंतहीन संघर्ष में नहीं बदलेगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “यह इराक जैसा युद्ध नहीं है,” और इसे एक सीमित, स्पष्ट उद्देश्य वाला ऑपरेशन बताया।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई युद्ध विश्लेषक इस बयान को अलग दृष्टिकोण से देख रहे हैं। उनका तर्क है कि अभियान की शुरुआत ऐसे माहौल में हुई थी जब वॉशिंगटन में सत्ता परिवर्तन (रेजीम चेंज) की चर्चाएँ तेज थीं। विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी आकलन यह था कि सुप्रीम लीडर सैय्यद अली ख़ामेनई के मारे जाने की स्थिति में ईरान की राजनीतिक संरचना तेजी से बदल सकती है, लेकिन घटनाक्रम ने इस अनुमान को सही साबित नहीं होने दिया।
ईरान ने जवाबी कार्रवाई में मध्य-पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों और युद्धक विमानों को निशाना बनाकर यह संदेश देने की कोशिश की कि वह किसी छोटे या अस्थिर राष्ट्र की तरह दबाव में आने वाला नहीं है। क्षेत्रीय सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद संघर्ष का दायरा कई पड़ोसी देशों तक फैल गया है।
प्रेस वार्ता में हेगसेथ ने दोहराया कि अमेरिका का मकसद ईरान में सत्ता परिवर्तन नहीं है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन का लक्ष्य तेहरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता, नौसेना ढांचे और सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निष्क्रिय करना है। उनके अनुसार, “यह कोई रेजीम चेंज अभियान नहीं है,” बल्कि विशिष्ट सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने की कार्रवाई है।
संयुक्त स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने भी अभियान को “निर्णायक” बताते हुए कहा कि हमले ईरान की मिसाइल प्रणाली, नौसैनिक ढांचे और अन्य सैन्य बुनियादी संरचनाओं पर केंद्रित हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि जैसे-जैसे अभियान आगे बढ़ेगा, कुछ नुकसान और चुनौतियाँ सामने आ सकती हैं।
हेगसेथ ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल अमेरिकी “बूट्स ऑन द ग्राउंड” यानी जमीनी सैनिक ईरान में तैनात नहीं हैं, हालांकि उन्होंने भविष्य की संभावनाओं से पूर्ण इनकार भी नहीं किया। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आवश्यकता पड़ने पर सेना उतारने की बात कही है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी जनमत लंबे युद्ध या सैनिक हताहतों को लेकर संवेदनशील रहता है।
अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि हमले “सटीक” और “सशक्त” हैं तथा उनका उद्देश्य क्षेत्रीय खतरे को सीमित करना है। हेगसेथ ने यह भी कहा कि 2025 में हुए पूर्व हमलों से ईरान के नाभिकीय कार्यक्रम को पहले ही क्षति पहुँचाई जा चुकी है और वर्तमान अभियान का मुख्य फोकस मिसाइल एवं सैन्य ढांचे को निष्क्रिय करना है, न कि परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करना।
इसके बावजूद, रणनीतिक विश्लेषकों के बीच यह बहस जारी है कि क्या आधिकारिक बयान और वास्तविक दीर्घकालिक उद्देश्य पूरी तरह समान हैं। कुछ का मानना है कि भारी सैन्य और राजनीतिक लागत के बाद वॉशिंगटन अब संघर्ष से बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहा है, जबकि आधिकारिक रुख इसे सीमित और लक्षित कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।
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