कानून या राजनीतिक बदला ? AIMIM नगरसेवक मतीन पटेल के घर पर बुल्डोज़र कार्रवाई महाराष्ट्र की राजनीति में तूफ़ान
(सिटिज़न सारांश ) नासिक के बहुचर्चित TCS धर्मांतरण प्रकरण ने अब केवल आपराधिक जांच तक सीमित न रहकर महाराष्ट्र की राजनीति में भी तीखी हलचल पैदा कर दी है। मुख्य आरोपी निदा ख़ान की छत्रपती संभाजीनगर (औरंगाबाद ) से गिरफ्तारी और AIMIM नगरसेवक मतीन पटेल के घर पर हुई बुल्डोज़र कार्रवाई के बाद भाजपा, शिवसेना और AIMIM आमने-सामने आ गए हैं।
भाजपा नेताओं ने इस पूरे मामले को “संगठित संरक्षण” और “राजनीतिक शह” से जोड़ते हुए AIMIM पर सीधे निशाना साधा। भाजपा विधायक नितेश राणे ने आरोप लगाया कि फरार आरोपी को शरण मिलना केवल व्यक्तिगत संबंधों का मामला नहीं बल्कि एक बड़े नेटवर्क की ओर संकेत करता है। उन्होंने राज्य सरकार से मामले की गहन जांच कराने और कथित रूप से जुड़े सभी लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की। भाजपा नेताओं ने यह सवाल भी उठाया कि यदि कोई सामान्य नागरिक किसी आरोपी को पनाह देता तो क्या उसे भी इतनी ही राजनीतिक सुरक्षा मिलती।
शिवसेना नेताओं ने भी प्रशासनिक कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं हो सकता। शिवसेना के शिंदे के महाराष्ट्र मे मंत्री तथा संभाजीनगर (औरंगाबाद ) के गार्जियन मिनिस्टर संजय शिरसाट ने इसे “कानून व्यवस्था के खिलाफ खुली चुनौती” बताते हुए कहा कि यदि अवैध निर्माण पाए गए हैं तो कार्रवाई होना स्वाभाविक है, चाहे आरोपी किसी भी दल से जुड़ा हो। सत्ता पक्ष के नेताओं ने यह संदेश देने की कोशिश की कि राज्य सरकार अपराध और अवैध निर्माण के मामलों में “ज़ीरो टॉलरेंस” की नीति अपना रही है।
दूसरी ओर AIMIM ने पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक प्रतिशोध और “चुनिंदा कार्रवाई” करार दिया है। AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष तथा पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने कहा कि यदि महानगरपालिका वास्तव में अवैध निर्माणों के खिलाफ निष्पक्ष अभियान चला रही है तो फिर भाजपा और शिवसेना से जुड़े नेताओं के निर्माणों पर भी समान कठोरता दिखाई जानी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि मतीन पटेल के मामले में प्रशासन ने असामान्य तेजी दिखाई, जबकि शहर में अनेक प्रभावशाली लोगों के कथित अवैध निर्माण वर्षों से जस के तस खड़े हैं।
इम्तियाज जलील ने यह भी स्पष्ट किया कि AIMIM ने प्रशासनिक कार्रवाई का सड़क पर उतरकर विरोध नहीं किया, बल्कि कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि पार्टी कानून का सम्मान करती है, लेकिन कानून का इस्तेमाल “राजनीतिक संदेश” देने के लिए नहीं होना चाहिए। कार्रवाई के बाद वे स्वयं महानगरपालिका मुख्यालय पहुंचे और अधिकारियों को भाजपा तथा शिवसेना नेताओं के कथित अवैध निर्माणों की सूची सौंपते हुए समान कार्रवाई की मांग की।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला अब केवल एक आपराधिक जांच नहीं रहा, बल्कि आगामी स्थानीय निकाय राजनीति और मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति से भी जुड़ता दिखाई दे रहा है। एक तरफ भाजपा और शिवसेना इसे “कानून और राष्ट्र सुरक्षा” के मुद्दे के रूप में पेश कर रही हैं, वहीं AIMIM इसे “टार्गेटेड पॉलिटिक्स” और मुस्लिम प्रतिनिधियों के खिलाफ चयनात्मक कार्रवाई बताने में जुटी है।
इसी कारण नासिक TCS प्रकरण अब अदालत, पुलिस जांच और महानगरपालिका कार्रवाई से आगे बढ़कर महाराष्ट्र की सियासत का बड़ा विवाद बन चुका है, जिस पर आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक बयानबाज़ी तथा कानूनी टकराव देखने को मिल सकता है।
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