औरंगाबाद संभाजीनगर महापौर चुनाव: भाजपा की नज़र अब कांग्रेस–एनसीपी (शरद पवार) के निर्वाचित सदस्यों पर
औरंगाबाद संभाजीनगर महानगरपालिका के महापौर चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज़ होती नज़र आ रही है। भारतीय जनता पार्टी की नज़र अब कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) से निर्वाचित सदस्यों पर टिक गई है। विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना शिंदे गुट से मोलभाव करने के बजाय भाजपा का आला नेतृत्व स्वबल पर सत्ता की बागडोर संभालने को ज़्यादा तवज्जो दे रहा है। इसी कड़ी में महापौर चुनाव में ‘ऑपरेशन लोटस’ की संभावनाएं बढ़ती दिखाई दे रही हैं।
गौरतलब है कि मतदान के तुरंत बाद ही राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा थी कि भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी, लेकिन स्पष्ट बहुमत से कुछ कदम पीछे रह जाएगी। नतीजे भी कुछ ऐसे ही सामने आए—57 सीटें जीतकर भाजपा ने महापौर पद पर अपनी दावेदारी तो मज़बूत कर ली, लेकिन बहुमत से मामूली अंतर रह गया।
भाजपा की सहयोगी शिवसेना शिंदे गुट को गठबंधन को लेकर अंतिम दिन तक असमंजस में रखा गया, जिसका खामियाज़ा उसे भुगतना पड़ा। अब शिंदे गुट के स्थानीय नेता चुटकी लेते हुए कह रहे हैं—“अब आया ऊँट पहाड़ के नीचे।” सूत्रों की मानें तो मात्र 13 सीटें जीतने वाली शिवसेना शिंदे गुट इस वक्त ज़ोरदार मोलभाव के मूड में है।
हालात को भांपते हुए भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने अपने स्थानीय नेताओं को सक्रिय कर दिया है और कांग्रेस व राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार) के निर्वाचित सदस्यों को अपने खेमे में लाने की कोशिशें तेज़ कर दी गई हैं। अगर सब कुछ भाजपा की रणनीति के मुताबिक चला, तो आने वाले दिनों में ‘ऑपरेशन लोटस’ को कामयाबी मिलती दिखाई दे सकती है।
इधर 22 जनवरी को मुंबई में महापौर पद के आरक्षण को लेकर ड्रॉ होने हैं। इसके साथ ही औरंगाबाद संभाजीनगर में महापौर चुनाव की गतिविधियां और तेज़ होने की संभावना है। अब सियासी गलियारों में यही सवाल गूंज रहा है—आख़िरकार ऊँट किस करवट बैठेगा?
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