अमेरिका ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगाए, 12 देशों पर पडेगा असर... ईरान ने कहा हम पहेले भी कर चुके है आर्थिक प्रतिबंधो का सामना !
[ सिटिज़न सारांश ] अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाते हुए नए प्रतिबंधों का ऐलान किया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने 24 अगस्त को वॉशिंगटन में इसकी घोषणा की। अमेरिका का कहना है कि इन प्रतिबंधों का मकसद ईरान के परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइलों, तेल कारोबार और कथित गुप्त वित्तीय नेटवर्क पर शिकंजा कसना है।
इन प्रतिबंधों का असर ईरान, चीन व हांगकांग, सिंगापुर, स्विट्ज़रलैंड, संयुक्त अरब अमीरात, मलेशिया, ब्रिटेन, फ्रांस, सीरिया, यूक्रेन, ग्रीस और मार्शल द्वीपसमूह से जुड़ी कंपनियों और कारोबारियों पर पड़ा है।
ईरान में खुफिया एवं सुरक्षा मंत्रालय और रक्षा एवं सशस्त्र बल रसद मंत्रालय को निशाना बनाया गया है। इससे जुड़े जिन लोगों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं, उनमें मोहम्मद हुसैन असलानी, रज़ा कदखोदाई और अरमान कहजादियन शामिल हैं। अमेरिका ने इन पर साइबर गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया है।
हांगकांग और चीन से जुड़ी कंपनियों में स्वीट ओशन इंडस्ट्रियल, आरपीटी टेक्नोलॉजी, शेनझेन स्वीट ओशन टेक्नोलॉजी, शेनझेन हुआमेई लियान्युन इंटरनेशनल लॉजिस्टिक्स, शेनझेन बोसिटोंग लॉजिस्टिक्स, बोसिटोंग सप्लाई चेन और लिलिमून नेविगेशन शामिल हैं। अमेरिका का आरोप है कि इन कंपनियों ने ईरान के परमाणु, मिसाइल और रक्षा नेटवर्क के लिए खरीद और लॉजिस्टिक्स में मदद की।
सिंगापुर में एज़्योर शिपिंग, ट्रांस आर्कटिक ग्लोबल मरीन सर्विसेज, आर्क चार्टरिंग और वेलब्रेड कैपिटल पर कार्रवाई की गई है। कारोबारी मंसूर तैयबभाई गांधी और ईरानी तेल कारोबारी मोहम्मद हुसैन शामखानी से जुड़े नेटवर्क को भी निशाना बनाया गया है।
इसके अलावा मलेशिया की वास्ट मार्ट, ब्रिटेन की एस्टानिका ट्रेडिंग, फ्रांस की ला निवेरनाइस डे रैफिनेज, मार्शल द्वीपसमूह की सिफ्रा शिपिंग और ग्रीस के अल्म्पर्टोस त्सोरिस तथा जॉर्जियोस त्सोरिस भी प्रतिबंधों की सूची में हैं। संयुक्त अरब अमीरात से जुड़े मोहम्मद अहमद सुहिल फत्तूह और इवान ओबुखोव पर भी कार्रवाई की गई है।
हालांकि अमेरिका ने ईरान के तेल कारोबार से जुड़े कुछ चीनी वित्तीय संस्थानों को फिलहाल प्रतिबंधों से बाहर रखा है। बेसेंट ने कहा कि वॉशिंगटन का मकसद वैश्विक वित्तीय व्यवस्था को नुकसान पहुंचाना नहीं है और देशों व कंपनियों को ईरान के साथ कारोबार खत्म करने का समय दिया जाएगा।
ईरान ने इन प्रतिबंधों को आर्थिक युद्ध बताया है। राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान की सरकार की प्रवक्ता फातिमेह मोहजेरानी ने कहा कि ईरान मुश्किल हालात से भी निकल जाएगा। वहीं आईआरजीसी के प्रवक्ता सरदार मोहेबी ने कहा कि ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाना युद्ध के मैदान में अमेरिका की नाकामी का संकेत है।
तेहरान स्थित रणनीतिक अध्ययन केंद्र के शोधकर्ता अली अकबर डारेनी ने कहा कि ईरान लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करता आया है और नए प्रतिबंधों से उसे आसानी से झुकाया नहीं जा सकेगा।
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