जुब्लि पार्क चौक की दुकान मे लगी भीषण आग... आपदा मे अब्दुल हि आया काम !
[ सिटिज़न सारांश ] सोशल मीडिया पर अक्सर जिन लोगों को नाम देखकर परखा जाता है, जिनकी देशभक्ति और नीयत पर सवाल उठाए जाते हैं, जिन को कपडो से पहचान ने के लिए कहा जाता है, सोशल मिडीया पर जिसकी पहचान "अब्दुल " के रूप मे की जाती है उन्हीं में से एक नौजवान ने आज छत्रपति संभाजीनगर में इंसानियत की ऐसी मिसाल पेश की, जिसकी हर तरफ चर्चा हो रही है। जुबली पार्क चौक पर लगी भीषण आग के दौरान जब लोग फायर ब्रिगेड का इंतजार कर रहे थे, तब एक युवक ने अपनी सूझबूझ और हिम्मत से संभावित बड़े हादसे को टालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आज दोपहर छत्रपति संभाजीनगर के व्यस्त जुबली पार्क चौक पर उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक वड़ा पाव की दुकान में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और दुकान में मौजूद गैस सिलेंडर के लीक होने की खबर से आसपास के लोगों में दहशत फैल गई।
घटनास्थल शहर के मुख्य मार्ग पर स्थित है। इसी रास्ते से सरकारी अस्पताल घाटी की ओर एम्बुलेंसों का चौबीसों घंटे आवागमन बना रहता है। आसपास दुकानें और रिहायशी मकान होने के कारण लोगों को किसी बड़े विस्फोट और भारी नुकसान की आशंका सताने लगी।
स्थानीय लोगों ने तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दी, लेकिन आग की लपटें लगातार बढ़ती जा रही थीं। लोग बेबस होकर मदद का इंतजार कर रहे थे। तभी वहां से पानी सप्लाई करने वाला एक निजी टैंकर गुजर रहा था।
इसी दौरान एक युवक आगे आया। युवक ने बिना समय गंवाए टैंकर को रुकवाया और आग बुझाने की पहल की। युवक की हिम्मत देखकर आसपास मौजूद अन्य युवा भी आगे आए और सभी ने मिलकर आग पर पानी डालना शुरू कर दिया।
कुछ ही देर में आग पर काफी हद तक काबू पा लिया गया और एक संभावित बड़ा हादसा टल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यदि समय रहते आग नहीं बुझाई जाती तो गैस सिलेंडर में विस्फोट होने से स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी।
इस पूरी घटना में एक और बात लोगों का ध्यान खींच रही है। आग बुझने के बाद युवक ने निजी टैंकर चालक को पानी के पैसे दिए और उसे गले लगाकर धन्यवाद कहा। वहां मौजूद लोगों ने इस दृश्य को इंसानियत और आपसी सहयोग की मिसाल बताया।
जब तक पुलिस, फायर ब्रिगेड और जनप्रतिनिधि घटनास्थल पर पहुंचे, तब तक स्थानीय युवाओं की मदद से आग काफी हद तक नियंत्रित की जा चुकी थी।
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि आपदा के समय लोगों की पहचान उनका धर्म, जाति या नाम नहीं, बल्कि उनके कर्म तय करते हैं। संकट की घड़ी में आगे बढ़कर म
दद करने वाले ऐसे लोगों की वजह से ही समाज में इंसानियत की लौ आज भी जल रही है।
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