तस्वीर से कहानी गढ़ना पत्रकारिता नहीं... पेजेशकियन के झुकने पर ‘चरण स्पर्श’ का दावा, बिना पुष्टि के खबरें परोसना पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर सवाल

Sep 13, 2026 - 17:37
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तस्वीर से कहानी गढ़ना पत्रकारिता नहीं... पेजेशकियन के झुकने पर ‘चरण स्पर्श’ का दावा, बिना पुष्टि के खबरें परोसना पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर सवाल

[ अली रज़ा आबेदी ] भारतीय मीडिया के एक हिस्से में किसी तस्वीर या कुछ सेकंड के वीडियो को देखकर पूरी कहानी गढ़ देने की प्रवृत्ति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और एक हिंदू धर्मगुरु की मुलाकात की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए। तस्वीर में पेजेशकियन धर्मगुरु के सामने झुके हुए दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद कुछ टीवी चैनलों, अखबारों और सोशल मीडिया पोस्टों में यह दावा किया गया कि उन्होंने हिंदू धर्मगुरु के पैर छुए।

लेकिन सवाल यह है कि क्या उपलब्ध तस्वीर और छोटी वायरल वीडियो क्लिप इस दावे को निर्णायक रूप से साबित करती है?

वीडियो के संदर्भ को लेकर एक अलग दावा भी सामने आया है कि पेजेशकियन नीचे गिरी किसी वस्तु को उठाने के लिए झुके थे। ऐसे में महज कुछ सेकंड के वीडियो या एक तस्वीर के आधार पर यह निष्कर्ष निकाल देना कि ईरानी राष्ट्रपति ने धार्मिक सम्मान के कारण चरण स्पर्श किया, पत्रकारिता के बुनियादी सिद्धांतों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

कैमरे की आंख मौजूद है, फिर भी निष्कर्ष पहले और तथ्य बाद में क्यों?

आज के दौर में किसी सार्वजनिक कार्यक्रम की तस्वीर और वीडियो को अलग-अलग एंगल से जांचना मुश्किल नहीं है। जब पूरा घटनाक्रम कैमरों में रिकॉर्ड हो रहा हो, तब पत्रकारिता का काम किसी एक फ्रेम को उठाकर सनसनी पैदा करना नहीं, बल्कि उसके पूरे संदर्भ की पड़ताल करना है।

हमारा मीडिया अक्सर “तिल का ताड़ और राई का पहाड़” बनाने में इतना व्यस्त दिखाई देता है कि उसे यह भी याद नहीं रहता कि कैमरे की आंख पूरे घटनाक्रम को रिकॉर्ड कर रही है और आज किसी भी वायरल दावे की तथ्य-जांच कुछ ही समय में की जा सकती है।

सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के एक राजनयिक कार्यक्रम को भी हिंदू-मुस्लिम चश्मे से देखने और उसी नजरिये से दर्शकों के सामने पेश करने की कोशिश की जाती है। धर्म किसी व्यक्ति की निजी आस्था हो सकता है, लेकिन पत्रकारिता का धर्म तथ्य और सत्य होना चाहिए।

पेजेशकियन का धर्मगुरु के सामने झुकना तस्वीर और वीडियो में दिखाई देता है। लेकिन उन्होंने धार्मिक सम्मान के कारण पैर छुए, यह दावा तब तक निर्णायक रूप से प्रमाणित नहीं माना जा सकता, जब तक पूरे वीडियो, प्रत्यक्ष घटनाक्रम या ईरानी राष्ट्रपति अथवा ईरान सरकार की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि सामने न आए।

ऐसे में अधूरे वीडियो और एक तस्वीर के आधार पर बड़े-बड़े दावे करना खबर से ज्यादा भ्रामक प्रचार को बढ़ावा देना है।

पत्रकारिता का उद्देश्य लोगों की भावनाओं को भड़काना नहीं, बल्कि उन्हें सही जानकारी देना है। यदि कोई घटना वास्तव में वैसी ही है जैसी दिखाई जा रही है, तो उसे प्रमाणित करने के लिए सनसनी की जरूरत नहीं पड़ती—तथ्य अपने आप बोलते हैं।

मीडिया को यह समझना होगा कि हर झुकना चरण स्पर्श नहीं होता और हर तस्वीर पूरी कहानी नहीं बताती।

 

 

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