शिवाजी कोण होता किताब को लेकर गायकवाड-आंबी विवाद ने पकड़ा तूल, कम्युनिस्टों का बुलढाणा में धडक मोर्चा
बुलढाणा में मंगलवार को राजनीतिक तनाव उस वक्त खुलकर सामने आ गया जब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विधायक संजय गायकवाड के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए शहर में धडक दी। इस प्रदर्शन में प्रकाशक प्रशांत आंबी भी मौजूद रहे, जिनके साथ हुए कथित फोन विवाद ने पूरे मामले को तूल दे दिया है।
मामले के अनुसार, आरोप है कि देर रात विधायक संजय गायकवाड ने प्रशांत आंबी को फोन कर " शिवाजी कोण होता " इस किताब के शिर्षक मे छत्रपती शिवाजी महाराज की अवमान ना को लेकर अभद्र भाषा ( गाली गलौज) का इस्तेमाल किया और जान से मारने की धमकी दी थी। इस बातचीत का ऑडियो सामने आने के बाद राज्यभर में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। हालांकि, इस दौरान प्रशांत आंबी ने संयम बनाए रखा, जिसकी कई सामाजिक व बौद्धिक वर्गों में सराहना भी हुई।
घटना के विरोध में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने पहले ही बुलढाणा में प्रदर्शन का ऐलान किया था। तय कार्यक्रम के अनुसार कार्यकर्ता शहर के जिजामाता स्टेडियम में एकत्र हुए, जहां उन्होंने शिवाजी कौन था? पुस्तक का सार्वजनिक वाचन किया। यह वाचन कार्यक्रम विरोध का प्रतीक बनकर सामने आया।
इसी दौरान पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर ग्रामीण पुलिस स्टेशन ले जाया गया। पुलिस कार्रवाई के दौरान भी कार्यकर्ता लगातार नारेबाजी करते रहे। “आमदार गायकवाड जवाब दो”, “छत्रपति शिवाजी महाराज की जय” और “कॉमरेड गोविंद पानसरे अमर रहें” जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
प्रदर्शनकारियों के हाथों में छत्रपति शिवाजी महाराज, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर, महात्मा ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले और भगत सिंह सहित विभिन्न महापुरुषों के चित्र भी देखे गए।
इस आंदोलन का नेतृत्व काॅमरेड एडवोकेट अभय टकसाल,
भाकपा के राज्य सचिव कॉमरेड सुभाष लांडे, कॉमरेड राजू देसले, कॉमरेड श्याम काले, कॉमरेड राम बाहेती, कॉमरेड नामदेव चव्हाण, कॉमरेड तुकाराम भस्मे तथा माकपा के राज्य सचिव कॉमरेड अजित नवले और कॉमरेड भीमराव बनसोड ने किया।
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम ने बुलढाणा सहित राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है और मामले के आगे और गरमाने के संकेत मिल रहे हैं।
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