फ्लाईदुबई हादसा ...नेतन्याहू सरकार कटघरे मे... इज़राइली मिडीया मे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर बहस

Oct 4, 2026 - 13:45
Oct 4, 2026 - 14:02
 0  31
फ्लाईदुबई हादसा ...नेतन्याहू सरकार कटघरे मे... इज़राइली मिडीया मे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर बहस

 [ सिटिज़न सारांश ] दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में हुई गंभीर घटना ने इज़राइल की विमान सुरक्षा व्यवस्था और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार की जवाबदेही को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। 30 सितंबर को विमान को आपात स्थिति में सऊदी अरब के तबूक में उतारना पड़ा था। इज़राइली मिडीया सहित दुनिया भर की मिडीया मे विमान के भारतीय पायलट स्मिथ माच्छार के सहास की तारीफ़ हो रही है! वहीं दुसरी ओर इज़राइल के प्रधानमंत्री अपने ही देश के मिडीया द्वारा उठाए जा रहे सवालो मे घिरते जा रहे है!

इज़राइली अख़बार हारेत्ज़ ने घटना के बाद सवाल उठाया कि अगर सुरक्षा तंत्र को संभावित खतरे का अंदेशा था तो उसे रोकने के लिए पहले से पर्याप्त कदम क्यों नहीं उठाए गए। अख़बार की रिपोर्ट और विश्लेषण में यह भी सवाल उठाया गया कि घटना के बाद यात्रियों की बहादुरी का जश्न मनाने के बजाय सुरक्षा व्यवस्था की विफलताओं की स्वतंत्र जांच क्यों न हो।

मामला इसलिए भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि इज़राइल में चुनाव नजदीक हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू ने विमान के यात्रियों से मुलाकात की और घटना को अपनी उस राजनीतिक छवि से जोड़ने की कोशिश की जिसमें वे खुद को इज़राइल की सुरक्षा का प्रमुख रक्षक बताते हैं। विपक्ष की ओर से आरोप लगाया गया कि सरकार इस घटना का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रही है।

इसी बीच एक अहम सवाल यह भी सामने आया कि जिस सह-पायलट पर हमला करने का संदेह है, वह इतनी संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय उड़ान में कैसे नियुक्त हुआ। रिपोर्टों में कहा गया है कि ओमान में उसके संबंध में पहले सुरक्षा संबंधी चिंताएं सामने आई थीं। इन दावों की जांच अभी जारी है और अंतिम जिम्मेदारी तय होना बाकी है।

विपक्ष के नेता याइर लैपिड ने भी कहा कि घटना से एक रात पहले नेतन्याहू द्वारा दी गई सुरक्षा ब्रीफिंग में ऐसी किसी संभावित विमान-हाइजैकिंग की जानकारी उन्हें नहीं दी गई थी। इस बयान ने सरकार की पूर्व-चेतावनी और सुरक्षा आकलन पर बहस को और तेज कर दिया है।

घटना के बाद फ्लाईदुबई की इज़राइल उड़ानों को अस्थायी रूप से रोकने और अतिरिक्त सुरक्षा जांच की व्यवस्था किए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। इससे यह सवाल और महत्वपूर्ण हो गया है कि यदि सुरक्षा उपायों में बदलाव घटना के बाद जरूरी समझे गए, तो वही उपाय पहले क्यों नहीं लागू किए गए थे।

हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि नेतन्याहू सरकार ने जानबूझकर चुनावी लाभ के लिए नागरिकों की जान जोखिम में डाली। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था, खुफिया आकलन और राजनीतिक जवाबदेही—तीनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन सवालों का अंतिम जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। 

 

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow