जब एक वीडियो ने संस्कृति को मोड़ दिया — Tyler Oliveira और भारत के “गोरेहब्बा” उत्सव के विवाद की कहानी

Oct 30, 2025 - 15:49
Oct 30, 2025 - 15:56
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जब एक वीडियो ने संस्कृति को मोड़ दिया — Tyler Oliveira और भारत के “गोरेहब्बा” उत्सव के विवाद की कहानी

(लेखक: अली रज़ा आबेदी)

कभी-कभी इंटरनेट की एक झलक हमें यह याद दिला देती है कि परंपरा, आस्था और संस्कृति सिर्फ खबरों का हिस्सा नहीं — यह लोगों की पहचान का हिस्सा होती हैं।

ऐसा ही एक मामला हाल-हिं में सामने आया जब अमेरिकी यूट्यूबर Tyler Oliveira ने भारत के एक छोटे गाँव में मनाये जाने वाले Gorehabba उत्सव का वीडियो पोस्ट किया, और उसके बाद जो हुआ, वो अकेले एक वायरल पोस्ट से कहीं बड़ा था।

मामला क्या था?

Oliveira ने 23 अक्टूबर 2025 को सोशल-मीडिया पर एक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने लिखा

“Happy Diwali! Yes, I went to India’s poop throwing festival. It was the shttiest experience of my life. I will never go back. Please pray that I survive.”

वीडियो में वे एक गाँव में मौजुद थे जहाँ लोग दिवाली के अगले दिन गोबर (sun-dried cow dung) एक-दूसरे पर फेंकते हैं — यह गाँव है Gumatapura (कर्नाटक, भारत)

उनकी वीडियो में उन्होंने हेलमेट-गॉग्ल्स लगाए हुए थे, पूरी तरह दाग-धब्बों से लिपटे थे, और एक वक्त उन्होंने कहा था, “I gotta get out of here.” 

 परंपरा का अर्थ — “गोरेहब्बा” क्या है?

यह उत्सव केवल अजीबोगरीब दृश्य नहीं है — इसके पीछे स्थानीय लोकविश्वास छिपा है।

गुम्मटापुरा गाँव में यह माना जाता है कि उनकी देवता Beereshwara Swamy का जन्म गोबर से हुआ था। 

इसलिए उत्सव के दिन ग्रामीण गोबर-केक इकट्ठा करते हैं, मंदिर में पूजा करते हैं, फिर आपस में उसे फेंकते हैं — इसे “शुद्धि”, “समृद्धि” और “स्वच्छता” का प्रतीक माना जाता है।

इस तरह समझा जा सकता है कि यह सिर्फ एक मस्ती-मय क्रिया नहीं है — बल्कि एक लोक-परंपरा है, जिसने कई पीढ़ियों से चलती आ रही है।

 विवाद का सूत्र

जब Oliveira ने इस उत्सव को अपनी भाषा में प्रस्तुत किया “poop-throwing festival”, “sh*ttiest experience” आदि शब्दों के साथ — तो यह स्थानीय लोगों के लिए संवेदनाएँ जगाने वाला बन गया:

कई भारतीय सोशल-मीडिया उपयोगकर्ताओं ने कहा कि उन्होंने इस रीति-रिवाज़ का अपमान किया है। 

कुछ ने आरोप लगाया कि यह वीडियो भारत की छवि को नकारात्मक रूप से पेश कर रहा है — जैसे कि “सारे भारत में ऐसा चलता है” जैसा संदेश जा रहा है। 

वीडियो के वायरल होने के बाद Oliveira ने लिखा 

“It isn’t racist to film a poop-throwing festival.” 

साथ ही उन्होंने एक पोस्ट में लिखा: “I’m sorry India…” लेकिन आलोचकों को यह “मॉक माफ़ी” जैसा लगा। 

इस पूरा मामला इस बात का उदाहरण बन गया कि विरल कंटेंट बनाते समय सामाजिक व सांस्कृतिक जिम्मेदारी कितनी महत्वपूर्ण है।

 हम क्या सीख सकते हैं?

इस घटना ने कुछ बातों को उजागर किया

दृष्टिकोण का प्रभाव जब कोई वीडियो बनाकर दिखाता है, वो सिर्फ घटना नहीं दिखाता — दर्शक के लिए अर्थ, भाव और संदर्भ भी ले आता है।

समान नहीं दिखने वाले परंपराओं का सम्मान हर संस्कृति की अलग रीति-रिवाज़ होती है, जो हमारे पहली नज़र में अजीब लग सकती है, लेकिन उनके पीछे गहरा अर्थ होता है।

मीडिया की भूमिका सोशल-मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल होना आसान है, लेकिन जब कंटेंट में संवेदनशीलता नहीं होती, तब विवाद उत्पन्न होना भी आसान है।

दर्शकों की जिम्मेदारी सिर्फ देखना नहीं, सवाल करना कि हम क्यों देख रहे हैं? क्या हमने प्रश्न किया कि यह परंपरा क्या है? क्या इसका अर्थ समझा है?

 निष्कर्ष

Oliveira का वीडियो केवल एक यात्रा-व्लॉग नहीं था — यह संस्कृति व दृष्टिकोण के बीच टकराव का चेहरा बन गया।

हमें याद रखना चाहिए कि

“जब हम किसी अन्य संस्कृति को ‘शॉक’ या ‘विशेष’ के रूप में दिखाते हैं, तो हम उसके भावना-विश्वास को नहीं दिखा रहे होते, बल्कि सिर्फ अपना दृष्टिकोण पेश कर रहे होते हैं।”

इसलिए, अगली बार जब हम किसी अनूठी परंपरा देखें — तथ्यों को जानें, भावनाओं को समझें, और फिर प्रतिक्रिया दें — क्योंकि हर उत्सव सिर्फ रंग-रूप नही, वो हमारी मानवता का हिस्सा है !

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