अमेरिकी सैनिक क़तर के एयरबेस पर लौटे, ईरान ने खोला अपना एयर स्पेस — क्या वाक़ई अमेरिका हमले से पीछे हटा?
मध्य-पूर्व में पिछले कई दिनों से बढ़े तनाव के बीच एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ अमेरिकी सैनिक क़तर में स्थित अपने प्रमुख हवाई अड्डे पर वापस लौट आए हैं। इसी दौरान ईरान ने भी अपना एयर स्पेस दोबारा खोल दिया है। इन दोनों घटनाओं के बाद यह सवाल तेज़ी से उठने लगा है कि क्या अमेरिका ने ईरान पर संभावित हमले का इरादा फिलहाल टाल दिया है?
सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी सैनिकों की क़तर वापसी को रूटीन रिडिप्लॉयमेंट बताया जा रहा है। पेंटागन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यह कदम किसी तत्काल सैन्य कार्रवाई के रुकने का आधिकारिक ऐलान नहीं है, बल्कि सुरक्षा और लॉजिस्टिक कारणों से लिया गया फैसला हो सकता है। हालांकि, टाइमिंग को देखते हुए इसे ईरान के साथ चल रहे तनाव से अलग करके देखना भी मुश्किल है।
दूसरी तरफ़, ईरान द्वारा एयर स्पेस खोलना एक अहम संकेत माना जा रहा है। आमतौर पर किसी देश का एयर स्पेस बंद करना सीधे तौर पर युद्ध या बड़े सैन्य खतरे की आशंका से जुड़ा होता है। ऐसे में ईरान का यह फैसला बताता है कि फिलहाल वहां हालात को कंट्रोल्ड और स्टेबल दिखाने की कोशिश की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान दोनों ही इस वक्त सीधे टकराव से बचने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। अमेरिका की तरफ़ से सख़्त बयानबाज़ी जारी है, लेकिन ज़मीनी हालात ये इशारा कर रहे हैं कि वॉशिंगटन कूटनीतिक दबाव और रणनीतिक चेतावनियों के ज़रिये ही ईरान को रोकना चाहता है, न कि तुरंत सैन्य हमला करके।
हालांकि, यह भी साफ़ है कि हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। अमेरिकी नौसेना और एयरफोर्स अब भी रीजन में अलर्ट मोड पर है, और ईरान भी अपनी सुरक्षा तैयारियों में कोई ढील नहीं दे रहा।
नतीजतन, यह कहना अभी जल्दबाज़ी होगी कि अमेरिका ने ईरान पर हमले से पूरी तरह पीछे हटने का फैसला कर लिया है। फिलहाल जो तस्वीर सामने आ रही है, वह तनाव में अस्थायी नरमी और दोनों पक्षों की तरफ़ से हालात को और बिगड़ने से रोकने की कोशिश को दिखाती है। आने वाले दिनों में कूटनीतिक और सैन्य गतिविधियां ही तय करेंगी कि यह शांति की तरफ़ बढ़ता कदम है या सिर्फ़ एक रणनीतिक विराम।
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