ईगल क्लॉ से आज तक: रेत का तूफ़ान, इमाम ख़ुमैनी की तस्बीह और अल्लाह की मदद
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर तेज़ होता दिख रहा है। ईरान में आंतरिक अस्थिरता, परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ता विवाद और अमेरिका की कड़ी चेतावनियों के बीच चार दशक पुरानी एक घटना बार-बार चर्चा में लौट आती है—ऑपरेशन ईगल क्लॉ। यह वही असफल अमेरिकी सैन्य अभियान है जिसने दोनों देशों के रिश्तों में स्थायी अविश्वास की नींव रखी।
ऑपरेशन ईगल क्लॉ: जहां से टकराव गहराया
अप्रैल 1980 में अमेरिका ने तेहरान स्थित अपने दूतावास में बंधक बनाए गए नागरिकों को छुड़ाने के लिए गुप्त सैन्य कार्रवाई की। अमेरिकी डेल्टा फोर्स और अन्य विशेष इकाइयाँ ईरान के रेगिस्तानी क्षेत्र “डेज़र्ट वन” तक पहुँचीं।
मिशन की योजना के समय कोई बड़ा मौसम अलर्ट जारी नहीं था और शुरुआती रिपोर्ट्स में आसमान साफ बताया गया था। इसी संदर्भ का उल्लेख बाद में अंतरराष्ट्रीय डॉक्यूमेंट्री चैनलों, जिनमें डिस्कवरी चैनल भी शामिल है, में किया गया।
हालांकि ज़मीनी हालात बदल गए। अचानक उठे स्थानीय रेत के तूफ़ान, तकनीकी खराबियों और फिर हेलिकॉप्टर तथा सैन्य विमान की टक्कर ने मिशन को विफल कर दिया। इस हादसे में आठ अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई और अमेरिका को बिना बंधकों को छुड़ाए वापस लौटना पड़ा।
ईरान में एक प्रचलित कथा यह भी है कि ऑपरेशन ईगल क्लॉ के दौरान देश के सर्वोच्च नेता इमाम रुहोल्लाह ख़ुमैनी तस्बीह पढ़ रहे थे, और उसी समय आया रेत का तूफ़ान ईश्वरीय हस्तक्षेप था।
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