महानगरपालिका चुनाव: भाजपा सबसे बड़ी पार्टी, AIMIM ने तोड़ा पिछला रिकॉर्ड
औरंगाबाद (संभाजीनगर) महानगरपालिका चुनाव के नतीजों ने शहर की राजनीति की दिशा साफ़ कर दी है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 58 सीटें जीतकर न सिर्फ़ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने का दावा मज़बूत किया है, बल्कि महापौर पद की रेस में भी खुद को सबसे आगे खड़ा कर लिया है।
वहीं ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने 33 सीटें जीतकर अपना ही पिछला रिकॉर्ड तोड़ दिया है और शहर की राजनीति में अपनी मज़बूत मौजूदगी दर्ज कराई है।
चुनाव में सबसे बुरी स्थिति दोनों शिवसेना गुटों की रही। एक समय मुंबई के बाद शिवसेना का सबसे मज़बूत किला माने जाने वाले तत्कालीन औरंगाबाद में शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) मात्र 6 सीटों पर सिमट गई।
शिवसेना (शिंदे गुट) के गार्जियन मिनिस्टर संजय शिरसाट और विधायक प्रदीप जैस्वाल अपने बेटे–बेटी को जिताने में तो सफल रहे, लेकिन पार्टी के लिए कोई बड़ा राजनीतिक करिश्मा नहीं दिखा सके। शिंदे गुट किसी तरह 12 सीटों पर जीत दर्ज कर पाया।
जैसा कि हमारे कल के विश्लेषण में राजनीतिक विश्लेषकों ने संकेत दिया था, शिवसेना शिंदे गुट के लिए सबसे बड़ा खतरा उसकी सहयोगी पार्टी भाजपा ही साबित हुई। आज आए चुनाव नतीजे इस आकलन को सही साबित करते नज़र आए।
कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (पवार गुट) को महज़ 1-1 सीट पर संतोष करना पड़ा। दूसरी ओर वंचित बहुजन आघाड़ी के चार उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) इस चुनाव में अपना खाता भी नहीं खोल पाई।
पूरे महाराष्ट्र में चर्चा में रहे शिवसेना (उद्धव गुट) के प्रत्याशी और पूर्व महापौर रशीद मामु ने शिवसेना नेताओं चंद्रकांत खैरे और अंबादास दानवे के बीच आपसी खींचतान के बावजूद अपनी सीट जीतने में सफलता हासिल की। उल्लेखनीय है कि मामु को शिवसेना उद्धव गुट की ओर से टिकट दिए जाने को लेकर भाजपा ने “मामु पार्टी” का नैरेटिव चलाया था।
मतगणना के दौरान दो पक्षों के बीच हुई झड़प के चलते पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा, जिसमें पूर्व महापौर, विकास जैन उनके समर्थक और कुछ पत्रकार घायल हुए।
चुनावी नतीजों के सामने आते ही अब महापौर पद को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज़ हो गई हैं और आने वाले दिनों में सत्ता समीकरणों को लेकर अहम घटनाक्रम देखने को मिल सकता है।
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